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अभिषेक के दफ्तर पर बुलडोज़र: सत्तारूढ़ पार्टी के 'नंबर दो' नेता के कार्यालय पर तोड़फोड़ की कार्रवाई

  • लेखक की तस्वीर: Rashtrix News Desk
    Rashtrix News Desk
  • 18 जुल॰
  • 2 मिनट पठन

कोलकाता — शनिवार को तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के पांच मंज़िला दफ्तर को पुलिस और केंद्रीय बलों ने चारों तरफ से घेर लिया। इसके तुरंत बाद बुलडोज़रों ने इमारत को ध्वस्त करना शुरू कर दिया।


दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन का दावा है कि आमतला-बारुईपुर रोड पर स्थित यह इमारत बिना वैध निर्माण-अनुमति के खड़ी की गई थी — और यही आधार बनाकर इसे गिराने की कार्रवाई शुरू हुई। शनिवार दोपहर से ही तोड़फोड़ शुरू हो गई, राज्य पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की निगरानी में बुलडोज़र पूरी ताकत से चलते रहे।


इस पूरे अभियान में जितनी सुरक्षा तैनात की गई, वह खुद बता देती है कि प्रशासन इस कदम के हर पहलू को कितनी सावधानी से संभाल रहा था। स्थानीय बीडीओ और बीएलआरओ की देखरेख में तोड़फोड़ का काम चला, और साथ में राज्य दमकल विभाग की एक टीम भी मौजूद रही। पूरे इलाके को गार्डरेल से घेर दिया गया। जैसे-जैसे समय बीतता गया, पुलिस बल की संख्या बढ़ती गई — आमतला मोड़ के पास आधी सड़क बैरिकेड से बंद कर दी गई।


अभिषेक बनर्जी कोई मामूली नेता नहीं हैं। 38 वर्षीय यह सांसद डायमंड हार्बर से चुने गए हैं, लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के दलनेता हैं, और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे — जिन्हें लंबे समय से उनका राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता रहा है। इसलिए राज्य के बुलडोज़रों का उन्हीं की पार्टी के दफ्तर के सामने खड़ा होना, महज़ 'नियमित कार्रवाई' कहकर टाला नहीं जा सकता — खासकर उस राज्य में, जहां अवैध निर्माण के आरोप नए नहीं, लेकिन इतनी बड़ी सुरक्षा-व्यवस्था के साथ कार्रवाई शायद ही कभी होती है।


रिपोर्ट लिखे जाने तक अभिषेक बनर्जी या तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। शनिवार दोपहर तक तोड़फोड़ का काम पूरे ज़ोरों पर जारी था।

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