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दिल्ली में शी जिनपिंग का रेड-कार्पेट स्वागत, भारत-चीन रिश्तों में नरमी के संकेत

लेखक की तस्वीर: WTN  News Network
WTN News Network
12 सित॰
2 मिनट पठन

BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने दिल्ली पहुंचे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का रेड-कार्पेट स्वागत किया गया। सात साल बाद भारत की उनकी यात्रा ऐसे समय हो रही है जब नई दिल्ली और बीजिंग वर्षों की तनातनी के बाद रिश्तों में धीरे-धीरे नरमी के संकेत दे रहे हैं।

दिल्ली में प्रतीकात्मक वापसी

शी जिनपिंग को रेड कार्पेट और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ स्वागत मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में हो रहे BRICS सम्मेलन में रूस के व्लादिमीर पुतिन और ईरान के मसूद पेजेश्कियन समेत कई नेता शामिल हो रहे हैं।

2020 में विवादित हिमालयी सीमा पर हुए घातक सैन्य संघर्ष के बाद दोनों देशों के रिश्तों में बड़ा तनाव आया था। उस संघर्ष में 20 भारतीय और चार चीनी सैनिक मारे गए थे। शी की मौजूदा यात्रा को रिश्तों को सुधारने की कोशिश में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

नरमी के साथ रणनीतिक प्रतिस्पर्धा

दोनों देशों के बीच उड़ानें और उच्चस्तरीय संपर्क धीरे-धीरे बहाल हुए हैं। चीन ने कहा है कि वह मतभेदों को उचित तरीके से संभालते हुए भारत के साथ अच्छे पड़ोसी और मित्र के रूप में काम करना चाहता है। इसके बावजूद क्षेत्रीय प्रभाव और BRICS में भूमिका को लेकर दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा जारी है।

BRICS के 11 सदस्य अब दुनिया की करीब आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। यूक्रेन और मध्य पूर्व के युद्ध तथा अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर समूह के भीतर मतभेद भी हैं। द गार्जियन के अनुसार, सम्मेलन में किसी एक देश का नाम लिए बिना एकतरफा युद्ध की निंदा करने वाला व्यापक संयुक्त घोषणापत्र आ सकता है।

BRICS की वैश्विक भूमिका को लेकर भारत और चीन की सोच भी अलग है। बीजिंग इसे पश्चिमी प्रभाव के मुकाबले एक मजबूत शक्ति के रूप में देखता है, जबकि नई दिल्ली BRICS को पश्चिम और विकासशील दुनिया के बीच एक पुल के रूप में बनाए रखना चाहती है।

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