
भविष्य के क्वांटम नेटवर्क को और बेहतर बनाएगा कोलकाता के बोस इंस्टीट्यूट का नया शोध
- Rashtrix News Desk

- 15 अग॰
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कोलकाता: भविष्य के क्वांटम कम्युनिकेशन नेटवर्क की दक्षता काफी हद तक बढ़ा सकता है, ऐसा एक नया सैद्धांतिक ढांचा तैयार किया कोलकाता के बोस इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने, जो कम संसाधनों का इस्तेमाल कर लंबी दूरी पर मज़बूत कनेक्शन बनाना संभव बनाएगा।
संस्थान के फिजिकल साइंसेज विभाग के डॉ दीप नाथ और प्रोफेसर सौमेन रॉय द्वारा किया गया यह शोध फिजिकल रिव्यू ए जर्नल में प्रकाशित हुआ है, जिसमें 'जनरल कॉनकरेंस पर्कोलेशन' (GCP) नाम के एक नए प्रोटोकॉल की बात कही गई है, जो क्वांटम कम्युनिकेशन कनेक्शन स्थापित करने के मौजूदा तरीकों से कहीं ज़्यादा कारगर है।
क्वांटम नेटवर्क दूर स्थानों के बीच सुरक्षित रूप से जानकारी भेजने के लिए एंटैंगलमेंट पर निर्भर करते हैं, लेकिन लंबी दूरी पर मज़बूत एंटैंगलमेंट बनाए रखना मुश्किल है, क्योंकि पर्यावरणीय शोर ट्रांसमिशन के दौरान कनेक्शन को कमज़ोर कर देता है। कंप्यूटर सिमुलेशन में पाया गया कि नया प्रोटोकॉल पूरे नेटवर्क को जोड़ने के लिए ज़रूरी न्यूनतम एंटैंगलमेंट के स्तर को कम कर देता है, जिससे ऐसे नेटवर्क बनाना आसान और संभवतः सस्ता हो जाएगा।
शोधकर्ताओं ने यह भी दिखाया कि यह ढांचा सांख्यिकीय भौतिकी की सुस्थापित अवधारणा 'पर्कोलेशन यूनिवर्सैलिटी क्लास' का पालन करता है— जो भविष्य के क्वांटम कम्युनिकेशन ढांचे को डिज़ाइन करने के सैद्धांतिक आधार को और मज़बूत करता है। बोस इंस्टीट्यूट भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन संचालित होता है।

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